sad shayari Mahino ka intejar Unknown 07:52:00वक़्त की बेवसी है ये या साजिश खुदा की कोई ख़ास है , दिल के है जो करीब इतना क्यों रोज़ इन आँखों को होता नही उसका दीदार है , कश्मकश मुहब्बत की ... Read more No comments:
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